कोरोना से जंग के दौरान टेस्टिंग से जुड़ी तीन बड़ी गलतियां, जो कर रहे हैं राज्य
कोरोना से जंग के दौरान टेस्टिंग से जुड़ी तीन बड़ी गलतियां, जो कर रहे हैं राज्य
- प्रति 10 लाख कम टेस्ट कर रहे राज्य
- कुछ राज्यों में नहीं बढ़ रही टेस्टिंग
लेकिन राज्यों के बीच टेस्टिंग को लेकर व्यापक विभिन्नता है. साथ ही टेस्टिंग को लेकर तीन बड़ी गलतियां हैं जो राज्य कर रहे हैं.
पहली गलती यह है कि कुछ राज्य बहुत कम लोगों का टेस्ट कर रहे हैं. मिसाल के लिए, गुजरात में भारत में कोरोनो वायरस केसों की चौथी सबसे बड़ी संख्या है, लेकिन हर दस लाख की आबादी पर टेस्टिंग को लेकर ये राज्य नीचे से पांचवें स्थान पर है. इस सूचकांक में सिर्फ बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे गरीब राज्यों की स्थिति ही गुजरात की तुलना में खराब हैं.

गुजरात हर दस लाख की आबादी पर सिर्फ 84 लोगों का टेस्ट कर रहा है. यहां तक कि इस मामले में झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य भी गुजरात से बेहतर कर रहे हैं. इतने कम लोगों का टेस्ट कर ये राज्य नए केसों को जल्दी खोजने की अपनी संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
दूसरी गलती यह है कि कुछ राज्य केसों की संख्या की तुलना में बहुत कम लोगों का टेस्ट कर रहे हैं. टेस्टिंग के दो महत्वपूर्ण उपाय हैं – टेस्ट पॉजिटिविटी दर (TPR) और हर दिन दस लाख लोगों की आबादी के अनुपात में किए गए टेस्ट. TPR के जरिए देखा जाता है कि टेस्ट किए गए लोगों में से जो पॉजिटिव आए, उनका हिस्सा कितना है. इन दोनों को साथ लेने पर पता चलता है कि किसी राज्य का कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में कैसा प्रदर्शन रहा.

ऊंचे TPR और कम दैनिक टेस्टिंग के साथ, महाराष्ट्र और गुजरात इस परिप्रेक्ष्य में सबसे अधिक परेशानी में हैं. दिल्ली का 12 प्रतिशत का TPR महाराष्ट्र (15.3 प्रतिशत) के बाद देश में दूसरा सबसे बड़ा है, लेकिन यहां पिछले 7 दिन में अधिक लोगों का टेस्ट हो रहा है.
पिछले सात दिनों में, दिल्ली ने हर दस लाख की आबादी पर 270 और महाराष्ट्र ने 111 टेस्ट किए. गोवा और जम्मू-कश्मीर सबसे अधिक लोगों का टेस्ट कर रहे हैं सबसे कम TPR वालों में शामिल हैं. पिछले सात दिनों में, गोवा ने हर दस लाख की आबादी के अनुपात पर 990 लोगों का टेस्ट किया. गोवा का TPR 1.05 प्रतिशत है. जम्मू और कश्मीर ने हर दस लाख की आबादी के अनुपात में 571 टेस्ट किए और इसका TPR 1.84 प्रतिशत है.
तीसरी गलती यह है कि कुछ राज्य टेस्टिंग को नहीं बढ़ा रहे हैं. अधिकतर राज्यों ने मई के मध्य से नए केसों में वृद्धि का अनुभव किया है. दिल्ली और गुजरात जैसे अधिक केसों वाले राज्य बढ़ते TPR का अधिक टेस्टिंग से जवाब नहीं दे रहे हैं. इसके उलट महाराष्ट्र और तमिलनाडु ने अपनी टेस्टिंग को बढ़ाया है.
जहां महाराष्ट्र और तमिलनाडु औसतन हर दिन लगभग 14,000 टेस्ट कर रहे हैं, वहीं दिल्ली और गुजरात औसतन हर दिन 6,000 से कम लोगों का टेस्ट कर रहे हैं.
खास तौर पर गुजरात, और कुछ हद तक दिल्ली ने अपने टेस्टिंग वक्र को समतल किया है जबकि यहां हर दिन केसों की संख्या थोड़ी बढ़ रही है. गुजरात दिल्ली से तीन गुना से ज्यादा आबादी होने के बावजूद दिल्ली जितने ही टेस्ट कर रहा है. 9 जून तक, गुजरात ने कुल 2,61,587 और दिल्ली ने 2,61,079 टेस्ट किए.

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