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सऊदी अरब को लगा 20 साल का सबसे तेज झटका, ये है वजह

सऊदी अरब को लगा 20 साल का सबसे तेज झटका, ये है वजह


02 जून 2020


  • सऊदी अरब को लगा 20 साल का सबसे तेज झटका, ये है वजह

    सऊदी अरब का विदेशी भंडार (Foreign Reserves) लगातार दूसरे महीने तेजी से गिरा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते कम से कम 20 सालों की ये सबसे तेज गिरावट है. मार्च और अप्रैल में विदेशी भंडार में तेज गिरावट दर्ज की गई. असल में दुनियाभर में कोरोना संकट और तेल के दाम काफी कम होने की वजह से आर्थिक रूप से सऊदी अरब को भारी नुकसान हो रहा है. इसी दौरान इकोनॉमी को राहत देने की उम्मीद में सऊदी अरब ने मार्च और अप्रैल में अपने विभिन्न विदेशी भंडार का इस्तेमाल किया.
  • सऊदी अरब को लगा 20 साल का सबसे तेज झटका, ये है वजह
    सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है. तेल की मांग घटने की वजह से दाम काफी गिर गया. इसकी वजह से सऊदी पर काफी बुरा असर पड़ा. वहीं, कोरोना वायरस की वजह से सऊदी में भी पाबंदियां लगाई गईं जिसका असर भी इकोनॉमी पर पड़ा.
  • सऊदी अरब को लगा 20 साल का सबसे तेज झटका, ये है वजह
    रॉयटर्स के मुताबिक, सऊदी ने मार्च और अप्रैल के बीच में अपने विदेशों के इन्वेस्टमेंट के लिए विदेशी भंडार से 40 बिलियन डॉलर पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड में ट्रांसफर किए.
  • सऊदी अरब को लगा 20 साल का सबसे तेज झटका, ये है वजह
    सऊदी अरबियन मोनेटरी अथॉरिटी (SAMA) की ओर से प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक, नेट फॉरेन असेट मार्च में 464 बिलियन डॉलर था जो अप्रैल में घटकर 443 बिलियन डॉलर हो गया. नेट फॉरेन असेट में विदेशी मुद्रा, विदेशों के डिपॉजिट और फॉरेन सिक्योरिटीज में किए गए इन्वेस्टमेंट शामिल हैं.
  • सऊदी अरब को लगा 20 साल का सबसे तेज झटका, ये है वजह
    मार्च में SAMA के नेट विदेशी असेट्स में 27 बिलियन डॉलर की गिरावट हुई. हालांकि, सऊदी के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान ने कहा कि कोई भी असाधारण ट्रांसफर नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुकूल समय होने की वजह से इन्वेस्टमेंट किए गए.
    बीते महीने इकोनॉमी की हालत बेहतर करने के लिए सउदी ने वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) तीन गुना किया था. सरकारी कर्मचारियों को लिविंग अलॉउंस देना भी स्थगित कर दिया गया था.



  • कोरोना के डर से इस देश में खेलों पर रोक लेकिन सेक्स वर्कर्स को दी गई मंजूरी
    कोरोना वायरस के बीच स्विट्जरलैंड में सेक्स वर्कर्स को वापस काम शुरू करने की इजाजत मिल गई है. यहां की सरकार ने फैसला किया है कि सेक्स वर्कर्स अपने काम पर जल्द लौट सकती हैं लेकिन जूडो, बॉक्सिंग और कुश्ती जैसे शारीरिक संपर्क वाले खेलों पर प्रतिबंध जारी रहेगा. सरकार के फैसले में इस विरोधाभास को लेकर लोग हैरानी जता रहे हैं.
  • कोरोना के डर से इस देश में खेलों पर रोक लेकिन सेक्स वर्कर्स को दी गई मंजूरी
    स्विट्जरलैंड में जिस्मफरोशी का कारोबार कानूनी रूप से वैध है और इसे 6 जून से फिर से शुरू किया जाएगा. इसके अलावा, सरकार ने यहां सिनेमाघरों, नाइटक्लब और सार्वजनिक पूल को भी खोलने की घोषणा कर दी है. हालांकि, कोरोना वायरस के प्रसार को देखते हुए नजदीकी संपर्क वाली खेल गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है.
  • कोरोना के डर से इस देश में खेलों पर रोक लेकिन सेक्स वर्कर्स को दी गई मंजूरी
    नए उपायों के साथ इस घोषणा से करीब 20,000 सेक्स वर्कर्स प्रभावित होंगे. हालांकि स्विस स्वास्थ्य मंत्री एलेन बर्सेट ने सेक्स वर्क को मंजूरी देने के बाद कहा कि वह अपने फैसले के विरोधाभास को मानते हैं.
  • कोरोना के डर से इस देश में खेलों पर रोक लेकिन सेक्स वर्कर्स को दी गई मंजूरी
    एलेन बर्सेट ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस मे कहा,  'निश्चित रूप से इसमें कुछ हद तक लोग व्यक्तिगत रूप से संपर्क में आएंगे लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा नामुमिकन नहीं है. मैं अपने जवाब के अजीब पहलू से अच्छी तरह वाकिफ हूं. आपको सच बताऊं तो इरॉटिक सर्विसेज को और पहले ही शुरू किया जा सकता था.
  • कोरोना के डर से इस देश में खेलों पर रोक लेकिन सेक्स वर्कर्स को दी गई मंजूरी
    इटली और फ्रांस जैसे पड़ोसी देश होने के बावजूद स्विट्जरलैंड में कोरोना वायरस के मामले अचानक से कम होने शुरू हो गए. नई रिपोर्ट के अनुसार, इस सप्ताह यहां 85 लाख लोगों के देश में संक्रमण के नए मामले प्रति दिन  20 से कम थे.
  • कोरोना के डर से इस देश में खेलों पर रोक लेकिन सेक्स वर्कर्स को दी गई मंजूरी
    स्विट्जरलैंड यूरोप का पहला देश है था जिसने इस महीने की शुरुआत में दुकानों, रेस्टोरेंट और स्कूलों को फिर से खोलने का निर्णय लिया और सोशल डिस्टेंसिंग में भी ढील दी.
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